जो सबको आकर्षित करे वह है कृष्ण, योगियों के योगी, परम् योगी। जिसकी लीला से पूर्ण विश्व मोहित है। वह है परम् योगी पूर्ण अवतार श्री कृष्ण।
जो अवस्था प्राप्त करने के लिये कई योगियों को एकांत में ध्यान करके पूरे जीवन के अंत मे जो स्तिथि प्राप्त होती है वह भगवान श्रीकृष्ण ने संसार मे रहते जीवन के शुरुआत में प्राप्त करते है वह है उनका सर्वोच्च दर्शन। संसार के सब सद्कर्म करते है फिर भी मोह से ग्रसित नही होना यह पूरे मानव समाज के लिये अद्भुत उदाहरण ओर युगों से मार्गदर्शन देता रहा है।
उनकी बाल्य अवस्था मे ही गोकुल के मखन, घी और अर्थव्यवस्था वही रहे और बाहर कंस के पास न जाये यह लोकल अर्थव्यवस्था को मजबूत करते थे बाल गोपाल, जो भी मखन होता है वह अपने सखा में बाट देना पर शोषण का भाग न बनना वह बताते है भगवान गोविंद। काल्या नाग को उस क्षेत्र के पानी का अधिकार नही पर जन सामान्य को हे। अपनी लोकल संपति को बचाना ओर जनसमूह के लिये प्राकृतिक संसाधन को उपयोग करना न कि कोई एक व्यक्ति ओर संस्था के लिये जो आज हो रहा है, जहा वह क्षेत्र के लोगो को अधिकार नही होता पर बाहर के संस्था कम्पनी को अधिकार दिया जाता है। क्षेत्रिय संपदा के सबसे पहले अधिकार जो होता है वह है उधर के लोगो का न कि बाहर के कोई एक व्यक्ति ओर संस्था का वह बताते है किशन कनैया। स्थायी लोगो का स्थायी संपदा पे पहला अधिकार उसमे ओर आगे उदाहरण देते गोवर्धन पर्वत का उधर के जनसमूह पे पहले अधिकार देके न कि बाहरी व्यवस्था का। हर प्राणी के अधिकारी के लिये बड़े व्यवस्था के सामने खड़े होते है और पूरे विश्व के अप्रितम उदाहरण स्थापित करते है गिरधर।
गौ माता के साथ घूमना, उनको प्रशन्न रखना परमयोगी रहके भी गौ माता की सर्वाधिक सेवा करना यह पूरे विश्व को गौ माता का महत्व बताते है ओर स्वयं को बताते है गोपाल। तभी से भारतीय संस्कृति उन्नत बनी गौ माता की सेवा करके ओर सुख समृद्धि प्राप्त करके। बंसी बजाते है गौ को प्रसन्न करते है, ग्वालो को प्रसन्न करते है, गोपियों को प्रशन्न करते पूरे विश्व को मधुर संगीत देते है। भारतीय संगीत को और भी समृद्ध करते है जो कि पूरे विश्व को अद्भत भेट है। गोपियों के साथ नृत्य करते है कीर्तन करते है और नाट्यशास्त्र को ओर उन्नत करके मानव कल्याण को निरंतर कल्याण कारी कला देते रहते है नटवर।
कंस के अत्याचार से मुक्त करना, लोकजीवन में आनंद भरना, भ्रष्ट व्यवस्था को सुव्यवस्था में परिवर्तित करना पर उसका स्वामी न बनना ऐसे अद्भुत निर्मोहित गुण के स्वामी है लीलाधर।
राधा कृष्ण का प्रेम निस्वार्थ ओर त्याग का प्रतीक युगों से है जो विश्व को प्रेम का अदृतिय प्रेम का संदेश देता है कि प्रेम का अर्थ अधिकार नही परन्तु त्याग समपर्ण है। प्रेम के सत्य स्वरूप का आचरण द्वारा शिखाते है राधास्वामी।
सुख, शांति और समृद्धि का सामुहिक जीवन और उसकी व्यवस्था का स्थापन का अलौकिक उदाहरण द्वारका नगरी बसा के इस विश्व को ओर एक अति सुंदर भेट देते है द्वारकाधीश।
दूर कहि भी अन्याय होता है तो द्वारका छोड़ के जरासंघ ओर दुर्योधन के अन्याय पूर्वक व्यवस्था का अंत करने लोककरुणा के लिए पांडवो का साथ देने अपने कष्टो की कभी चिंता न करना पर परोपकार जीवन कैसे जीना यह बताया माधव ने।
पूरे जीवन का सार उन्होंने श्रीमद भगवत गीता स्वरूप दे दिया जो कि अर्जुन को जीवन संदेश के रूप में है परंतु उस स्वरूप में पूरे विश्व को अनुपम भेट मिली जो युगों से महापुरुष ओर जन सामान्य जो जीवन जीने की कला शिखाते है। भारतीय लोगो ने युगों से उसका अनुकरण किया यहां आर्ट ऑफ लीविंग की अलग क्लास की कोई जरूरत नही यहां के हर व्यक्ति जो गीता जीवन मे उतारे वह साधारण जन आर्ट ऑफ लिविंग का चलता फिरता उदाहरण है। ग्वाल समाज हो या क्षत्रिय या योगी या प्रशासक हर समाज के व्यक्ति को प्रेरणादायक जीवन जीने का पथदर्शक है भगवान पूर्ण पुरषोत्तम कृष्ण।
युगों से धर्म की स्थापना के लिए लड़ना मिट जाना शिखाते है भगवान कृष्ण और उनके मधुर ओर दिव्य संदेश है भगवद गीता।
गीता सबके लिये अविरत प्रेरणा स्त्रोत रही वह शंकराचार्य हो या स्वामी विवेकानंद या महर्षि अरविंद या महर्षि रमण, लोक मान्य तिलक या महात्मा गांधी या विनोबा जी। सबका मार्गदर्शन मा के स्वरूप से युगों करती रही श्रीमद भगवदगीता।
कृष्ण का जीवन भक्ति रस है ज्ञानमय है योगमय है, सर्वोत्तम कर्मयोगी है। हजारो साल से अनेक संत निरंतर लिखते आये, गाते आये आने वाले समय मे भी यह गुणगान चलेगा लोगो को जीवन मे प्रेरणा देगा, मार्ग दिखायेगा, आत्मा से परमात्मा का मिलन करवायेगा, समाज को अनेक लाभ देगा। यह स्तुति का कदापि अंत नही होगा। में मेरे शब्दों को यहां विराम देता हूं। जय श्री कृष्ण

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