Wednesday, 29 January 2020

ज्ञान जानकारियों से परे है। (Knowledge is beyond information)

हम सब जानकारियां इकट्ठा कर रहे है और उसको ज्ञान समज रहे है, ओर जानकारियां इकठ्ठा करते करते हमारे अंदर सूक्ष्म रूप से अहंकार आ जाता है हमको पता भी नही चलता। ज्ञान तो अनुभव से ही हो सकता है। तभी भारत मे कई बुजर्ग या तथाकथित पढ़ाई नही की उनको देखके या बाते करने से पता चलता है वह पूरे दुनिया की बाते नही करते पर वह अपनी, अपने परिवार की या अपने गांव की बात करते है। काफी सुंदर लगता है वही बात जो प्रत्यक्ष देखी हुई हो जिसपे कुछ कर भी शके।

हम चले पूरी दुनिया की बात करने क्योंकि हमारे सिलेबस में फ्रेंच रिवोल्यूशन भी है और अमरीकन रिवोल्यूशन भी है विश्व के कोई कोने में क्या रिसर्च हुआ क्या टेक्नोलॉजी आयी वह भी है जो हमारे सामने प्रत्यक्ष रूप से कुछ भी नही है। ऐसी जानकारी दुखी कर देंगी, भय पैदा करेंगी, हम वह बदलने का सोचे या कार्य करे पर बात बहुत दूर की है,नियंत्रण में कुछ भी नही। आत्मसुधार की बात नही करते, आजूबाजू में क्या हो कर सकते है नही देखते,  अपने शरीर का, मन का अनुभव करना छोड़ देते है ओर जानकारी के चक्कर मे ज्ञान प्राप्त या अनुभव करना ही छोड़ देते है। हमारी सूक्ष्म दृष्टि गायब होती हुई नजर आती है, हम दो आंख से कम से कम समय मे पूरी दुनिया देखना चाहते है पर अपने आप पे दृष्टि नही डालना चाहते। भीतर क्या कमिया वह निकाले बिना भला विश्व का भी कैसे भला होगा।
आज की जो टेक्नोलॉजी है वह लगातार जानकारियां देती रहती है वह विश्व के कोने में क्या हो रहा है उसकी जानकारी जिसका प्रत्यक्ष रूप से कोई लेना देना न हो फिर भी मनुष्य के मन मे भय, अहंकार, आनंद वगेरा भर देता है। कभी विचार आता है कि कितना नुकसान दायक है सब पे में ध्यान दे रहा हु पर खुद पे कहा मेरा मन पलभर में कहा चला जाता है वह नही देख पाता। किसी बुजर्ग जो पढ़े लिखे नही उनसे बात करके पता चलता है कि कभी किसी किताब का रेफरेन्स नही, कभी कोई अलग दुनिया की बात नही, जो अनुभव किया वही।

 में भी एक ऐसा इंसान ही हु जिसमे पूरी दुनिया की जिज्ञासा है, जो कई साल से जानकारियां बटोरता जाता है , भावना भी अच्छी है पर इतने साल निकालने के बाद पता चलता है कि पढ़ने में जितना समय दिया उतना अनुभव में नही दिया। जानकारी से दृष्टि मिली उसपे अनुभव करूँगा पर पूरे विश्व मे घूमे बिना गाँव मे भी रहके यह हो शकता था, जो मेरे गांव में रहे उनको उधर का जो कई दसको का अनुभव रहा वह मेने दुनिया को जानने के चक्कर मे घूमा दिया। उनके पास बेठने ने से ऊपर मेने किताब या ऑथर के चक्कर मे ज्यादा प्रत्यक्ष अनुभव वाला ज्ञान खो दिया। जानकारी संतुष्ट नही कर सकती। मन को स्थिर नही कर सकती, मन तो आज भी वैसा ही चंचल है जैसा बिस साल पहले था। सायकोलोजी का ज्ञान प्राप्त करके भी अगर मन पे कुछ काम न किया वह अनुभव न किया तो दुनिया के बड़े बड़े सायकोलॉजिस्ट वह चाहे वेस्टर्न हो या zen हो या कोई भारतीय हो और वह क्या बोले ओर वह मुझे पता है उसका भी क्या मतलब रहा?

સ્વાસ્થ્ય સંવાદ

સ્વાસ્થ્ય સવાંદ ગ્રુપ ની તારીખ 18 - Aug - 20, સાંજે 8.30 થી 10.00 વાગ્યા સુધી સ્વસ્થ કેમ રહેવું અને આહાર વિહાર માં જે કાળજી લેવી એના પર હું ...