Monday, 6 February 2017

शाकाहार - विज्ञानं, धर्म और जन कल्याण





शाकाहार का इतिहास:
शाकाहार के प्रारंभिक रिकॉर्ड ईसा पूर्व 6ठी शताब्दी में प्राचीन भारत में पाए जाते हैं। उदाहरणों में आहार घनिष्ठ रूप से प्राणियों के प्रति नान-वायलेंस के विचार (भारत में अहिंसा कहा जाता है) से जुड़ा हुआ है और धार्मिक समूह तथा दार्शनिक इसे बढ़ावा देते हैं।

प्राचीनकाल में रोमन साम्राज्य के ईसाईकरण के बाद शाकाहार व्यावहारिक रूप से यूरोप से गायब हो गया। मध्यकालीन यूरोप में भिक्षुओं के कई नियमों के जरिये संन्यास के कारणों से मांस का उपभोग प्रतिबंधित या वर्जित था।
अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी संघ, 1908 में स्थापित किया गया है। पश्चिमी दुनिया में भी, 20वीं सदी के दौरान पोषण, नैतिक और अभी हाल ही में, पर्यावरण और आर्थिक चिंताओं के परिणामस्वरुप शाकाहार की लोकप्रियता बढ़ी है।

शाकाहार और स्वास्थ्य:
अमेरिकन डाएटिक एसोसिएशन और कनाडा के आहारविदों का कहना है कि जीवन के सभी चरणों में अच्छी तरह से योजनाबद्ध शाकाहारी आहार "स्वास्थ्यप्रद, पर्याप्त पोषक है और कुछ बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए स्वास्थ्य के फायदे प्रदान करता है।

बड़े पैमाने पर हुए अध्ययनों के अनुसार मांसाहारियों की तुलना में ह्रदय रोग शाकाहारी पुरुषों में 30% कम और शाकाहारी महिलाओं में 20% कम हुआ करते हैं।

सब्जियों, अनाज, बादाम आदि, दूध, और दूध के उत्पादों में शरीर के भरण-पोषण के लिए आवश्यक पोषक तत्व, प्रोटीन और अमीनो एसिड हुआ करते हैं।शाकाहारी आहार में संतृप्त वसा, कोलेस्ट्रॉल और प्राणी प्रोटीन का स्तर कम होता है और कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फोलेट और विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट तथा फाइटोकेमिकल्स का स्तर उच्चतर होता है।

शाकाहारी निम्न शारीरिक मास इंडेक्स, कोलेस्ट्रॉल का निम्न स्तर, निम्न रक्तचाप प्रवृत्त होते हैं; और इनमें ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह टाइप 2, गुर्दे की बीमारी, अस्थि-सुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस), अल्जाइमर जैसे मनोभ्रंश और अन्य बीमारियां कम हुआ करती हैं। खासकर चर्बीदार भारी मांस (Non-lean red meat) को भोजन-नलिका, जिगर, मलाशय और फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते खतरे के साथ सीधे तौर पर जुड़ा पाया गया है। अन्य अध्ययनों के अनुसार प्रमस्तिष्कवाहिकीय (cerebrovascular) बीमारी, पेट के कैंसर, मलाशय कैंसर, स्तन कैंसर, या प्रोस्टेट कैंसर से होने वाली मृत्यु के मामले में शाकाहारी और मांसाहारियों के बीच में कोई उल्लेखनीय अंतर नहीं है; हालाँकि शाकाहारियों के नमूने कम थे और उनमें पूर्व-धूम्रपान करने वाले ऐसे लोग शामिल रहे जिन्होंने पिछले पाँच साल में अपना भोजन बदला है।

2010 के एक अध्ययन में सेवेंथ दे एडवेंटिस्ट्स के शाकाहारियों और मांसाहारियों के एक ग्रुप के बीच तुलना करने पर शाकाहारियों में अवसाद कम पाया गया और उन्हें बेहतर मूड का पाया गया।

डॉ जे Oldfield, वरिष्ठ फिजिशियन, लेडी मार्गरेट अस्पताल, लिखते हैं: ये अकाट्य सत्य है की शाकाहार में वो हर तत्व मौजूद है  जो मानव की सभी जरूरतों को पूरा कर सकता हैं | मांस अप्राकृतिक भोजन है जो शरीर में विभिन्न विकार उत्पन्न करता है| इससे मानव  अनेक रोगों जैसे कैंसर ,ज्वर और पेट के कीड़े से संक्रमित हो जाता है| मांस भक्षण पैदा होने वाले १०० मेसे ९९ लोगों में रोगों का गंभीर कारन है |

मांस खाना और शराब का सेवन दोनों एक जेसे ही हैं| शराब की लत स्वाभाविक मृत्यु की तरह है जब मांस हटा दिया जाये| जन्म नियंत्रण उन लोगों में कठिन है जो मांस खाते हैं| मानसिक नियंत्रण मास्भ्क्शियों में एकदम असंभव है | देखो की बाघ जो मॉस खता है कितना क्रूर है और हठी और गाय जो शाकाहारी है कितने शांतिप्रिय हैं| मांसभक्षण बुध्दी पर सीधा बुरा असर डालता है| मांस खाने वाले देशों में कैंसर से मरने वालों की संख्या अधिक हैं| पश्चिमी देशों में डॉक्टर मरीज को शाकाहार पर रखते हैं और वो जल्दी ही ठीक हो जाते हैं|

शाकाहार पोषक तत्व:
फाइबर आहार, फोलिक एसिड, विटामिन सी और और मैग्नेशियम के ऊँचे स्तर तथा संतृप्त वसा अर्थात चर्बी के कम उपभोग को शाकाहारी भोजन का लाभकारी पहलू माना जाता है।

प्रोटीन:
हार्वर्ड विश्वविद्यालय और अमेरिका,ब्रिटेनकनाडाऑस्ट्रेलियान्यूजीलैंड तथा विभिन्न यूरोपीय देशों में किये गये अध्ययनों से इसकी पुष्टि होती है कि विभिन्न प्रकार के पौधों के स्रोतों से आहार उपलब्ध होते रहें और उनका उपभोग होता रहे तो शाकाहारी भोजन पर्याप्त प्रोटीन मुहैया करता है। खिलाड़ियों और शरीर को गठीला बनाने वालों की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकता है।

यह दालों, अनाज, चना, मटर, सोयाबीन, मूँगफली, काजू, बादाम, हरी सब्जियों, दूध, दही, पनीर, सेव, फल, मेवे आदि में पर्याप्त मात्रा में आया जाता है।


लौह(IRON):
शाकाहारी खाद्य पदार्थ लौह से भरपूर होते है, इनमें काजू, हेम्पसीड, राजमा, मसूर दाल, जौ का आटा, किशमिश मुनक्का, लोबिया, अनेक नाश्ते में खाये जानेवाला अनाज, सूर्यमुखी के बीज, छोले, टमाटर का जूस, शीरा, अजवायन और गेहूँ के आटे की रोटी भी शामिल हैं। 

विटामिन बी12:
लैक्टो शाकाहारी दूध उत्पादों से बी12 प्राप्त कर सकते हैं और वेगांस दृढ़ीकृत खाद्य तथा पूरक आहार से प्राप्त कर सकते हैं चूंकि मानव शरीर बी12 को सुरक्षित रखता। 

फैटी एसिड:
ओमेगा 3 फैटी एसिड के पौधे-आधारित या शाकाहारी स्रोतों में सोया, अखरोट, कैनोला तेल (रेपसीड), किवी फल और विशेषकर हेम्पसीड, चिया सीड, अलसी, और लोनिया या कुलफा शामिल हैं। वनस्पति या पेड़-पौधों से प्राप्त खाद्य पदार्थ अल्फा-लिनोलेनिक एसिड प्रदान कर सकते हैं, लेकिन लंबी-श्रृंखला एन-3 फैटी एसिड ईपीए (EPA) और डीएचए (DHA) प्रदान नहीं करते, पर  हाल ही में, कुछ कंपनियों ने समुद्री शैवाल के सत्त से भरपूर शाकाहारी डीएचए अनुपूरण की बिक्री शुरू कर दी है।

कैल्शियम:
हरे-पत्तेदार साग, जिनमें प्रचुर कैल्शियम हुआ करता है। कैल्शियम के कुछ स्रोतों पालक, दूध और दूध उत्पाद, केले में कैल्शियम से भरपूर हैं।

विटामिन डी
शाकाहारियों में विटामिन डी का स्तर कम नहीं होना चाहिए (हालाँकि अध्ययनों के अनुसार आम आबादी के अधिकांश में इसकी कमी है। पर्याप्त और संवेदी यूवी (UV) सूर्य धूप सेवन से विटामिन डी की आवश्यकताएं मानव शरीर के खुद के उत्पादन के जरिये पूरी हो सकती हैं। दूध और अनाज जैसे उत्पाद विटामिन डी प्रदान करने के अच्छे दृढीकृत स्रोत हो सकते है।

 फॉस्फोरस:  
बढते शरीर और दिमाग की ताकत के लिये यह विशेष लाभदायक है और पनीर, दही, गेहूँ, मक्का, दाल, दूध, छाछ, पनीर, बादाम, समस्त मीठी फल, खांड, मुरब्बा आदि में पाया जाता है।

Medical Basis of Nutrition Published by Charitable के अनुसार शाकाहार में निम्न विटमिंस पाये जाते हैं-
  • विटामिन A- हरी सब्जियों, नीबू, अमरूद, आँवला, संतरा, मौसमी आदि में मिलता है।
  • विटामिन B- हरी पत्तेदार सब्जियों तथा अनाज में पाया जाता है।
  • विटामिन C- हरी सब्जियों, नीबू, अमरूद, आँवला, संतरा, मौसमी आदि में मिलता है।
  • विटामिन D- इसका प्रमुख स्त्रोत है सूर्य की किरणें। यद्यपि पशु तथा पौधों से प्राप्त खाद्य पदार्थों में भी कुछ मात्रा में प्राप्त होता है।
  • विटामिन E- यह घी मक्खन में बहुतायत से होता है।
  • विटामिन K- यह हरी सब्जियों में पाया जाता है।
चिकित्सकीय प्रयोग:
पश्चिमी दवा में, कभी-कभी मरीजों को शाकाहारी भोजन का पालन करने की सलाह दी जाती है। रुमेटी गठिया के लिए एक इलाज के रूप में शाकाहारी आहार का उपयोग किया जाता है। डॉ॰डीन ओर्निश, एमडी, ने यूसीएसएफ (UCSF) में अनेक अच्छी तरह से नियंत्रित अध्ययन किये, जिसने कम वसा वाले शाकाहारी भोजन सहित जीवन शैली में हस्तक्षेप के जरिये कोरोनरी धमनी रोग को वास्तव में ठीक कर दिया। आयुर्वेद और सिद्ध जैसी चिकित्सा प्रणाली एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में शाकाहारी भोजन की सलाह देती हैं।

शरीर विज्ञान:
तर्क दिया जाता है कि शरीर रचना की दृष्टि से मनुष्य शाकाहारियों के अधिक समान हैं, क्योंकि इनकी लंबी आंत होती है, जो अन्य सर्वभक्षियों और मांसाहारियों में नहीं होती हैं। पोषण संबंधी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक होमिनिड्स ने तीन से चार मिलियन वर्ष पहले भारी जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप मांस खाने की प्रवृत्ति विकसित की, जब जंगल सूख गये और उनकी जगह खुले घास के मैदानों ने ले लिया, तब शिकार  के अवसर खुल गये। 

शाकाहार और धर्म

हिंदू धर्म
भारतीय खाना शाकाहारी व्यंजनों की एक विस्तृत श्रृंखला की वजह से हिंदू धर्म, भारत की आबादी का बहुमत द्वारा अभ्यास प्रदान करता है, शाकाहारी भोजन प्रोत्साहित करती है। हिंदू धर्म के अधिकांश बड़े पंथ शाकाहार को एक आदर्श के रूप में संभाले रखा है। इसके मुख्यतः तीन कारण हैं: पशु-प्राणी के साथ अहिंसा का सिद्धांतआराध्य देव को केवल "शुद्ध" (शाकाहारी) खाद्य प्रस्तुत करने की नीयत और फिर प्रसाद के रूप में उसे वापस प्राप्त करनाऔर यह विश्वास कि मांसाहारी भोजन मस्तिष्क तथा आध्यात्मिक विकास के लिए हानिकारक है। 


जैन धर्म
जैन धर्म नैतिक आचरण के रूप में शाकाहार होने की शिक्षा देता है। जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत ही अहिंसा हैं। प्राणियों के घात के बिना मांस की उत्पत्ति नहीं होती। अतः मांसभक्षी व्यक्ति के हिंसा अनिवार्य रूप से होती है। यदि कोई कहे कि हम तो स्वयं मरे हुए जीवों का मांस खाते हैं, जब हम जीव को मारते ही नहीं हैं तो हमें हिंसा का दोष कैसे लगेगा

बौद्ध धर्म
सामान्य तौर पर बौद्ध धर्म, मांस खाने का निषेध नहीं करता है, महायान बौद्ध धर्म में, ऐसे अनेक संस्कृत ग्रंथ हैं जिनमे बुद्ध अपने अनुयायियों को मांस से परहेज करने का निर्देश देते हैं।

सिख धर्म
दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने "अमृतधारी" सिखों, या जो सिख रेहत मर्यादा का पालन करते हैं, उन्हें मांस या वो मांस जो कर्मकांड के तहत पशुओं को मारकर प्राप्त किया गया हो, उसे खाने से मना किया है।
 
यहूदी धर्म
मध्ययुगीन विद्वानों (मसलन, जोसेफ अल्बो) ने शाकाहार को एक नैतिक आदर्श के रूप में माना, सिर्फ पशुओं के कल्याण के लिए ही नहीं, बल्कि इसलिए भी कि पशुओं की ह्त्या करने से यह कृत्य करने वाले में नकारात्मक चारित्रिक लक्षण विकसित होने लगते हैं। इसलिए, उनकी चिंता पशु कल्याण के बजाय मानवीय चरित्र पर पड़ने वाले संभावित हानिकारक प्रभाव थे। दरअसल, रब्बी जोसेफ अल्बो का कहा कि मांस के उपभोग का त्याग करना इसलिए भी जरुरी है कि यह सिर्फ नैतिक रूप से गलत है बल्कि अरुचिकर भी है।
यहूदी धर्म और ईसाई धर्म दोनों के साथ संबंध रखने वाले प्राचीन एसेंस धार्मिक समूह ने सख्ती से शाकाहार को चलाया, ठीक उसी तरह जिस तरह हिन्दू/जैनीअहिंसा या "निष्पाप" विचारों पर यकीन करते हैं।

ग्रीक और रोमन
प्राचीन ग्रीक दर्शन में शाकाहार की एक लंबी परंपरा है। कहते हैं पाइथागोरस शाकाहारी थे और उसकी शिक्षा-दीक्षा माउंट कार्मेल में हुई थी, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जहाँ एक शाकाहारी समुदाय था इसलिए उम्मीद की जाती है कि उनके अनुयायी भी शाकाहारी होंगे। बताया जाता है कि सुकरात शाकाहारी थे और एक आदर्श गणतंत्र में लोगों को, कम से कम दार्शनिक-शासकों को क्या खाना चाहिए, इस पर उन्होंने अपने संवाद में इसका वर्णन किया था कि सिर्फ शाकाहारी भोजन करना चाहिए। उन्होंने खासतौर पर कहा कि अगर मांस खाने की अनुमति दी गयी तो समाज को और भी अधिक डॉक्टरों की आवश्यकता होगी।

ईसाई धर्म
मौजूदा ईसाई संस्कृति सामान्य रूप से शाकाहार नहीं है। हालाँकिसेवेंथ डे एडवेंटिस्ट और पारंपरिक मोनैस्टिक शाकाहार पर जोर डालते हैं। इसके अलावा ऑर्थोडॉक्स चर्च के सदस्य 'उपवास' के दौरान शाकाहारी आहार का पालन कर सकते हैं।

इस्लाम
इस्लाम के अनुयायियों को चिकित्सकीय कारण या फिर व्यक्तिगत तौर पर मांस का स्वाद पसंद करने वालों को शाकाहार चुनने की आजादी प्रदान करता है। इराकी धर्मशास्त्रियों, महिला रहस्यवादी और बसरा के कवि राबिया अल-अदावियाह, 801 में जिनका इंतकाल हुआ; और श्रीलंका के सुफी संगीतकार बावा मुहैयाद्दीन जिन्होंने फिलाडेलफिया में बावा मुहैयाद्दीन फेलोशिप ऑफ नॉर्थ अमेरिका की स्थापना की; सहित कुछ प्रभावशाली मुसलमानों में शाकाहार का चलन रहा है।
जनवरी 1996 में, इंटरनेशनल वेजीटेरियन यूनियन ने मुस्लिम वेजीटेरियन/वेगन सोसाइटी की स्थापना की घोषणा की।

पर्यावरण

पिछले दिनों जब ब्राजील की राजधानी रियो डी जनेरो में दुनिया भर के पर्यावरणवादी, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी और कई राष्ट्रों के प्रमुख ग्लोबल वार्मिग के खतरों पर चर्चा के लिए जमा हुए, तो वहां से एक मजबूत आवाज मांसाहार के खिलाफ उठी। वहां कहा गया कि अगर धरती को बचाना है, तो मांसाहार त्याग दो। पर्यावरणवादियों का कहना है कि अगर खतरनाक ग्रीन हाउस गैसों को कम करना है, तो इसे छोड़ना ही होगा। कहा जाता है कि दुनिया में ग्रीन हाउस गैसों का जो उत्पादन हो रहा है, उसमें एक-तिहाई हिस्सेदारी मीट उत्पादन वाले पशु पालन उद्योग की ही है। रियो के सम्मेलन में इस बात को काफी जोर देकर कहा गया



पर्यावरण शाकाहार इस विचारधारा पर आधारित है कि जन उपभोग के लिए मांस उत्पाद और पशु उत्पाद विशेष रूप से कारखाने में तैयार खाद्य पर्यावरण की दृष्टि से अरक्षणीय होते हैं। 2006 में संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से किए गए पहल के अनुसार, दुनिया में पर्यावरण संबंधी की दुर्दशा में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक मवेशी उद्योग है, खाद्य पदार्थों में अंशदान के लिए आधुनिक तरीकों से पशुओं की तादद बढ़ाने से 'बहुत ही बड़े पैमाने पर' वायु और जल प्रदूषण, भूमि क्षरण, जलवायु परिवर्तन जैव विविधता के नुकसान हो रहा है।

“The UN खाद्य और खेती संस्था(एफएओ) has estimated that direct emissions from meat production account for about 18% of the world's total greenhouse gas emissions. So I want to highlight the fact that among options for mitigating climate change, changing diets is something one should consider.” 
— राजेंद्र पचौरी, Chairman, इंटरगवर्नमेंटल पेनेल ऑन क्लाइमेट चेंज

विश्व इतिहास पर दृष्टि डालने से पता चलता हैं कि संसार के सभी प्रसिद्ध महापुरुष चिन्तक, वैज्ञानिक, कलाकार, कवि, लेखक जैसे महात्मा गाँधी, विनोबा भावे, पाइथागोरस, चूटार्क प्लौटीनस, सर आईजन न्यूटन, महान चित्रकार लिनाडों डाविसी, डाक्टर एनी बेसेन्ट अलबर्ट आईन्सटाइन, रेवरेण्ड डा. वाल्टर वाल्श जार्ज बर्नार्ड शा, टॉल्सटॉय, कवि मिल्टन, पोप, शैले, निकोला टेस्ला, सुकरात यूनानी दार्शनिक अरस्तु सभी शाकाहारी थे शाकाहार ने ही उन्हें सहिष्णुता, दयालुता, अहिंसा आदि सद्गुणों से विभूषित किया

महान वैज्ञानिक अल्वर्ट आईन्सटाईन कहते थे कि शाकाहार का हमारी प्रकृति पर गहरा प्रभाव पड़ता है यदि दुनिया शाकाहार को अपना ले' तो इन्सान का भाग्य पलट सकता है ल्योनार्डो डाविसी तो पिंजरों में कैद पक्षियों को खरीद कर पिंजरे खोल कर उन्हें उड़ा दिया करते थे, वे कहते थे यदि मनुष्य स्वतन्त्रता चाहता है तो पशु पक्षियों को कैद क्यों करें सेंट मैब्यू, सेंट पाल मांसाहार को धार्मिक पतन का सूचक मानते थे मैथोडिस्ट और सकेथ डे एडवेण्टिएस्ट मांस खाने और शराब पीने की सख्त मनाही करते हैं टालस्टाय और दुखोबोर (रुस के मोमिन ईसाई) भी मांसाहार को ईसाई धर्म के विरुद्ध मानते थे

यूनानी दार्शानेक पायथागोरस के शिष्य रोमन कवि सैनेका जब शाकाहारी बने तब उन्हें यह सुखद और आश्चर्य जनक अनुभव हुआ कि उनका मन पहले से अधिक स्वस्थ, सावधान समर्थ हो गया
जार्ज बर्नार्ड शॉ ने एक कविता में ऐसे लिखा है हम मांस खाने वाले वे चलती फिरती कब्रें है, जिनमें वध किये हुए जानवरों की लाशें दफन की गई है, जिन्हें हमारे स्वाद के चाव के लिये मारा गया है
 
बनार्ड शॉ को डाक्टरों ने कहा कि यदि आप मांसाहार नहीं करेंगे तो मर जायेंगे इस पर बर्नार्ड शॉ ने कहा कि मांसाहार से तो मृत्यु अच्छी है उन्होंने डाक्टरों से कहा कि यदि मैं बच गया तब मैं आशा करता हूँ कि आप शाकाहारी हो जाएँगे शॉ तो बच गए किन्तु डाक्टर शाकाहारी नहीं बने। उस महान् आत्मा ने साथी जीवों को खाने की बजा मर जाना स्वीकार किया।
इसी प्रकार महात्मा गांधी का बच्चा जब सख्त बीमार हुआ तो डाक्टरों ने उनसे कहा कि यदि इसे मांस का सूप नहीं दिया गया तो यह जिन्दा नहीं रहेगा, किन्तु महात्मा गांधी ने कहा कि चाहे जो परिणाम हो मांस का सूप नहीं देंगे। बच्चा बगैर मांस के प्रयोग के ही बच गया।

चाणक्य नीति में कहा गया हैं कि जो मांस खाते है, शराब पीते हैं उन पुरुष रूपी पशुओं के बोझ से पृथ्वी दुःख पाती है। रमण महिर्षी ने अहिंसा को सर्वप्रथम धर्म बताया, सात्विक भोजन जैसे फल, दूध, शाक, अनाज आदि को ही एक निश्चित मात्रा में लेने का आदेश दिया है। भारतीय ऋषि-मुनि कपिल, व्यास पाणिनि, पातांजलि शंकराचार्य, आर्यभट्ट आदि सभी महापुरुष, इस्लाम के सभी सूफी सन्त ' अहिंसा परमोधमः' का पाठ पड़ाने वाले महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर, गुरुनानक, महात्मा गाँधी सभी शुद्ध शाकाहारी थे और सभी ने मांसाहार का विरोध किया है, क्योंकि शुद्ध बुद्धि आध्यात्मिकता मांसाहार से संभव नहीं है।

महात्मा गाँधी ने तो यहाँ तक कहा हैं कि मेरे विचार के अनुसार गौ रक्षा का सवाल स्वराज्य के प्रश्न से छोटा नहीं है। कई बातों में मैं इसे स्वराज्य के सवाल से भी बड़ा मानता हूँ। मेरे नज़र में गौ-वध मनुष्य वध एक ही चीज है

      
सन्दर्भ :

१) विकिपीडिया
 २) धि गार्डीअन
 ३) www.worldhealth.net
४) विद्यासागर.नेट
 ५)  स्पेन्सर, कॉलिन. द हेरेटिक्स फीस्ट: अ हिस्ट्री ऑफ़ वेजेटरीनिज़्म. चौथा एस्टेट शास्त्रीय हाउस, पीपी. 33-68, 69-84  
 ६) Religious Vegetarianism From Hesiod to the Dalai Lama, ed. Kerry S. Walters and Lisa Portmess, Albany 2001, p. 13–46. 
७) पासमोरे, जॉन. "द ट्रीटमेंट ऑफ़ ऐनिमल्स," जर्नल ऑफ़ द हिस्ट्री ऑफ़ आईडियाज़ 36 (1975) p. 196–201.
 ४)  "Frequently Asked Questions - Food Ingredients". Vegetarian Resource Group. अभिगमन तिथि: 9 जुलाई 2010.
  

સ્વાસ્થ્ય સંવાદ

સ્વાસ્થ્ય સવાંદ ગ્રુપ ની તારીખ 18 - Aug - 20, સાંજે 8.30 થી 10.00 વાગ્યા સુધી સ્વસ્થ કેમ રહેવું અને આહાર વિહાર માં જે કાળજી લેવી એના પર હું ...