आज आये दिन यही सुन ने को मिलता हे की गांधीजी ने देश को
बर्बाद कर दिया, अब कहने वाले लोग ऐसे ही की उनको यह तक पता नही की पान
खाके पिचकारी कहां मारनि हे। काफी दूख की बात हे की जिसको पूरी दुनिया ने
माना ओर उसके बताये रास्ते पर चलके विश्व कल्याण के प्रयास किये जा रहे हे
पर उसी महान आत्मा को गाली देना आम बात हो रही हे।
आज ईसी लिए मजबूर हो गया हु बापू के बारे में लिखने के लिए पर
में मेरे विचार नही लिख रहां हु। मेरे जेसे सामान्य मनुष्य की बात भी नही
हे उस महात्मा के बारे में लिखने की। उसी लिए विश्व ओर भारत के हर क्षेत्र के
महापुरुष ने कया कहां बापू के लिए। सायद ईस से लोग यह तो सोचे की सब
महापुरुष महात्मा गांधी के सामने नतमस्तक हो उनके गुणगान करे तोह कुछ तो
विशेषता होगी।
परमहंस योगानंद-
मात्र एक सौ पौंड वजन के इस क्षीणकाय संत के शरीरसे शारीरिक,
मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की आभा प्रकट हो रही थी. उनकी हलकी भूरि
आँखों में बुद्धि, ईमानदारी और विवेक का तेज था. इस राज्नीतिक्ग्य ने हजारो
कानूनी, सामजिक और राजनीतिक लडाइयों में विजय पाई थी. महात्मा गाँधी ने
भारत की कोटि-कोटि अशिक्षित जनता के हृदय में अपना जो अटल स्थान बनाया है,
वैसा स्थान अपनी जनता के हृदयों में विश्व के किसी अन्य नेता ने नहीं
बनाया. उनकी विख्यात उपाधि महात्मा उनके प्रति जनता के सहज आदर एवं प्रेम
की निशानी है. उनकी खातिर गाँधी केवल धोती पहनकर रहते हैं
चक्रवर्तीराज गोपालाचारी-
महान परंपरा का उत्तराधिकारी
इस महान व्यक्ति पर भारतमाता पीड़ा और करुणा से ऐंठ गई।
भारतमाता और भारतीयों से इतना प्रेम किसी ने नहीं किया होगा जितना महात्मा
गांधी ने किया। दिल्ली में घटी दुघर्टना भारतवासियों के भविष्य के इतिहास
के लिए एक सुर, एक लय,एक तर्क और एक संगीत प्रदान करे। मैं प्रार्थना करता
हू! कि भारत का इतिहास उस लय और ताल में लिखा जाए जिसे भारतमाता ने महात्मा
गांधी के धराशायी होने पर महसूस किया था। इतनी गरिमामय मृत्यु किसी और की
नहीं हो सकती। वे अपने राम की शरण में चले गये। वे बिस्तर पर पानी के
लिए, डाक्टर या नर्स से गिडगिड़ाते हुए नहीं मरे, न तो बिस्तर पर पड़े-पड़े
अनर्गल प्रलाप करते हुए मरे। वे खड़े-खड़े मरे,बैठे भी नहीं। शायद राम भी
व्यग्र थे उन्हें अपने पास बुलाने के लिए, इसलिए प्रार्थना स्थल तक पहु!चने
से पहले ही उन्हें अपनी शरण में बुला लिया।
जब सुकरात ने अपने विचारों के लिए और जीसस ने अपनी आस्था के
लिए मृत्यु का वरण किया, तब उन्हें लगा होगा उन जैसी मृत्यु किसी और की
नहीं होगी।
पंडित जवाहरलाल नेहरू -
जीता जागता मसीहा
महान एवं प्रतिष्ठित लोगों की कांस्य और पाषाण मूर्तिया!
बनायी गई हैं। लेकिन दैवी शक्ति से संपन्न इस महात्मा ने लाखों लोगों के
दिलों में अपना घर बनाया और इसलिए हम वह बन सके जो कुछ हम हैं। हाला!कि उस
स्तर तक नहीं पहु!च पाए जहा! हमें पहु!चना चाहिए था। वे भारत के कुछ चुने
स्थानों, ठिकानों और सभाओं में ही नहीं छाए, बल्कि हर दलित, शोषित,
उपेक्षित और दुखी लोगों के दिलों में समा गए। वे लाखों लोगों के दिलों में
रहते हैं और अनंतकाल तक रहेंगे।
... वे चले गए और पूरे भारत में निराशा और करुणा व्याप गई है।
हमारी समवेदनाए! पता नहीं मुझे, कब उबारेंगीं, लेकिन हमारी भावनाए! इस बात
पर गौरवान्वित होंगी कि हमारी पीढ़ी के लोग इतने प्रभावशाली व्यक्ति से
संबद्ध हो सके, उनके साथ काम कर सके। आनेवाले समय में, हमारे बाद की सदियों
एवं शताब्दियों में लोग जब इस पीढ़ी के बारे में विचार करेंगे, जब यह
मसीहा धरती पर आया था, तो सोचेंगे और उनके बताए रास्ते पर चलेंगे चाहे वह
कितना भी छोटा आदमी हो। हम उनके ऋणी हैं और हमेशा रहेंगे।
सरदार वल्लभभाई पटेल -
उनका महान बलिदान हमें राह दिखाएगा
हालांकि उनका शरीर कल शाम चार बजे राख में तब्दील हो जाएगा।
पर उनकी शिक्षा हमारे साथ रहेगी। मुझे लगता है कि गांधीजी की अमर आत्मा अभी
भी यहा! मौजूद है और भविष्य में भी इस देश की दिशा तय करने में अहम भूमिका
निभाएगी। जिस विक्षिप्त युवक ने उनकी हत्या की है वह अगर यह सोचता है कि
गांधीजी की हत्या करके वह उनके मिशन को नष्ट कर रहा है,तो मैं कहू!गा कि वह
गलत है। शायद ईश्वर चाहता है कि गांधीजी का मिशन उनकी मृत्यु से पूरा और
समृद्ध हो।
मुझे विश्वास है कि गांधीजी का सर्वोच्च त्याग हमारे देश के
प्रत्येक नागरिक की चेतना को जगाएगा और प्रत्येक भारतीय के मन में उच्चतर
जिम्मेदारियों का अहसास कराएगा। मैं आशा और प्रार्थना करता हू! कि हम
गांधीजी के मिशन को पूरा कर सकें। इस मुश्किल घड़ी में हममें से कोई भी
हताश नहीं रह सकता और हम सभी एकजुट होकर राष्टं पर आयी आपदा का बहादुरी से
सामना करेंगे। आइए, हम सभी गांधीजी की शिक्षा और उनके आदर्शों पर चलें।
श्रीमती सरोजिनी नायडु -
अपने देश को आजादी और आत्मसम्मान दिलाया
महात्मा गांधी, जिनका तेजस्वी शरीर कल तक निष्ठापूर्वक
प्रज्ज्वलित था, अभी मरे नहीं हैं। यह सच है कि दिल्ली में कई राजाओं का
अंतिम संस्कार हुआ, यह भी सच है कि दिल्ली में जिन आत्माओं को चिरशांति
मिली, उनके शरीर को महान वीरोचित सम्मान के साथ अंतिम संस्कार स्थल तक लाया
गया - लेकिन यह छोटा आदमी उन सभी सेनापतियों से अधिक बहादुर था। दिल्ली
सदियों से महान वंति का केंद्र रही है पर महात्मा गांधी ने अपने देश को
विदेशी गुलामी सेमुक्त कराया और आत्मसम्मान दिलाया।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद -
हिंदू समाज का मुक्तिदाता
क्या हम सपने में भी सोच सकते हैं कि हिंदुओं और उनके धर्म को
गांधीजी ने हानि पहुचायी?क्या यह संभव है कि हिंदू समाज को उदार बनानेवाला
एवं निचले तबके के दबे-कुचले लोगों का मुक्तिदाता ऐसा सोच भी सकता
है ? लेकिन संकुचित मानसिकता और सीमित दृष्टिवाले जो लोग हिंदू धर्म के
मूलतन्व भी नहीं समझते हैं,उन्होंने इसको अन्यथा लिया जिसका सीधा नतीजा है
वर्तमान माहौल।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन -
गुम होते अतीत का इकलौता प्रतीक
मैं गांधीजी पर हुए हमले से स्तब्ध हू!। आश्चर्यजनक एवं
कल्पनातीत घटना घटी है। हमारे समय के निर्दोषतम, शिखरस्थ एवं अत्यंत
प्रेरणादायी व्यक्ति एक पागल के गुस्से का शिकार हुआ। इससे यह साबित होता
है कि हममें सुकरात के दिनों से लेकर जिसे जहर का प्याला पीना पड़ा और जीसस
जिसे सूली पर चढ़ना पड़ा - हममें कोई सुधार नहीं हुआ।
जयप्रकाश नारायण -
हमें उनकी राह पर चलना चाहिए
यह शोक का अवसर है, बोलने का नहीं। हमें रोने दें, देश को
रोने दें और विश्व के महानतम व्यक्ति की हत्या के कलंक को अपनी आत्मा से धो
लेने दें। हमें महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर अवश्य चलना चाहिए। वे एक
विशेष मिशन के साथ दिल्ली आए थे। करो या मरो। उन्होंने काफी काम किया और
अपना जीवन अपने मिशन को पूरा करने में समर्पित कर दिया। आइए, अब हम उनके
अधूरे काम को पूरा करने में लग जाए!।
घनश्यामदास बिरला -
योद्धा, मसीहा और संत
मानवीय इतिहास में यह अनोखी बात है कि एक अकेला व्यक्ति एक ही
समय योद्धा, मसीहा और संत तीनों था और उससे भी अधिक वह विनम्र और मानवीय
था - ये वे गुण हैं जो उनके चरित्र में प्रमुखता से दिखाई पड़ते हैं।
लॉर्ड माउंटबेटन-
सत्य और प्रेममय जीवन
गांधीजी, प्रेम एवं सहिष्णुता का प्रकाशपुंज थे,उनकी मृत्यु
से सचमुच मानव जगत को बड़ा नुकसान हुआ है। इस गहरे शोक के बावजूद भारत को
इस बात का गर्व होना चाहिए कि उसने विश्व को एक ऐसा व्यक्ति दिया जिससे लोग
हमेशा प्रेरणा पाते रहेंगे। भारत और संपूर्ण विश्व में भी, शायद आने वाली
सदियों में, वैसा व्यक्ति फिर नहीं हो पाएगा। इस मुश्किल घड़ी में हमारे
लिए सांत्वना की बात यह है कि उनका जीवन, जो सत्य, सहिष्णुता और प्रेम से
भरा था,समस्याग्रस्त संसार को प्रेरणा देगा।
आल्बर्ट आईएन्स्टिन -
जो भी मानव जगत के बेहतर भविष्य के लिए चिंतित हैं - महात्मा
गांधी के दुखद निधन से अवश्य आहत हुए होंगे। वे अपने ही सिद्धांतो, अहिंसा
के सिद्धांतों की बलि चढ़ गए। वे इसलिए मारे गए कि अपने देश में काफी
उथल-पुथल और आम गुस्से के बावजूद उन्होंने अपनी सशत्र सुरक्षा को ठुकरा
दिया। उनका अटूट विश्वास था कि ताकत का इस्तेमाल भी अपराध है और इससे बचा
जाना चाहिए। अपने इसी विश्वास को लेकर उन्होंने एक महान देश की आजादी की
लड़ाई का नेतृत्व किया। गांधीजी ने दिखा दिया कि आम लोगों की ताकत को जीवन
के उच्च नैतिक मानदंडों द्वारा भी एकजुट किया जा सकता है, उसके लिए आम तौर
पर अपनायी जानेवाली राजनीतिक कुटिलता और चालबाजिया! जरूरी नहीं हैं।
पूरी दुनिया में महात्मा गांधी की प्रशंसा की वजह यह भी है कि
वे राजनीतिक क्षेत्र में भी उच्चतर मानवीय संबंधों के पक्ष में खड़े रहने
वाले इकलौते व्यक्ति रहे। उस स्तर पर पहुचने के लिए हमें अपनी पूरी ताकत
लगा देनी चाहिए। हमें यह मुश्किल सबक भी अवश्य लेना चाहिए कि भविष्य में
मानवता के स्थायित्व के लिए जरूरी है, अंतर्राष्टींय संबंधों में भी, कि
फैसले कानून और न्याय के आधार पर हो न कि ताकत के बल पर जैसा कि अब तक होता
आया है। बाहरी सना से अधिछत, अपने लोगों का नेता, एक राजनेता जिसकी सफलता
कलाबाजी, रहस्य और तकनीकी कौशल पर निर्भर नहीं थी बल्कि अपने व्यक्तित्व से
समझाने की क्षमता, एक विजयी योद्धा, बौद्धिक एवं मानवता का आदमी जिसने
अपनी सारी क्षमता लोगों की उन्नति और बेहतरी के लिए लगायी, एक व्यक्ति
जिसने यूरोपीय व्रता का विरोध किया और इस तरह वह सर्वोपरि हुआ।
'मैं गाँधी को हमारे युग का एकमात्र सच्चा महापुरुष मानता
हूँ। आने वाली पीढ़ियाँ कठिनाई से यह विश्वास कर पाएँगी कि गाँधी जैसा
हाड़-माँस का बना व्यक्ति सचमुच इस धरती पर कभी टहलता था।'
अमेरिकन प्रेसिडेंट रूजवेल्ट-
इस बात में संदेह नहीं कि गांधी में महान आध्यात्मिक गुण थे
और एक मात्र उम्मीद -हालांकि वह अपने लोगों के बीच में नहीं है, यह है कि
उनका प्रभाव 'विश्व को देने` के गुण के कारण है और हमें आशा है कि उनकी
हत्या लोगों को हिंसा से विमुख करेगी।
डॉ. मार्टिन लूथर किंग (जूनियर)-
अन्य लोगों की तरह मैंने भी गांधी को सुना था, पर मैंने
गंभीरता से उनका अध्ययन नहीं किया। जब मैंने पढ़ा तो अहिंसक प्रतिरोध के
उनके अभियान से काफी प्रभावित हुआ... सत्याग्रह का पूरा सिद्धांत गहराई में
मुझमें समाया। गांधी संभवतः इतिहास में पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ईसा
के 'प्रेम` के संदेश को व्यक्तियों से लेकर ताकतवर और सामाजिक ताकतों से
बड़े पैमाने पर बातचीत के जरिए फैलाया। जिस बौद्धिक एवं नैतिक संतोष को मैं
बेंथम एवं मिल के उपभोगवाद, मार्क्स और लेनिन की वंति, हॉब्स के सामाजिक
संबंध सिद्धांत, रूसो के 'प्रछति की ओर लौटो` के आशावाद और नीत्से के
सुपरमैन फिलॉसॉफी में नहीं पा सका - मुझे गांधी के अहिंसक-प्रतिरोध दर्शन
में वह मिला। अगर मानवता को प्रगति करनी है तो गांधी को भुलाया नहीं जा
सकता। उन्होंने विश्वशांति एवं सद्भाव को मानवीय दृष्टि से देखा, उससे
प्रेरित हुए और वैसा ही सोचा, किया तथा जिया। हम अपने अस्तित्व की कींमत पर
ही उनकी उपेक्षा कर सकते हैं।
रोमाँ रोला-
'गांधी केवल भारत के राष्टींय इतिहास के नायक ही नहीं है
जिनकी महान स्मृतिया! लोगों को रोशन करती रहेंगी, बल्कि पश्चिमी दुनिया के
लिए भी गांधी ने, ईसा के संदेशों को जो भुला दिये गए थे -पुनर्जीवित किया।`
'अनेक लोगों के लिए वे ईसा का ही अवतार थे। स्वतंत्र चिंतको
तथा दूसरों के लिए गांधीजी रूसो और टॉलस्टाय का ही विस्तार थे जिन्होंने
सभ्यता के अपराधों तथा भ्रमों को तोड़ा और मनुष्य को प्रगति, साधारण जीवन
और स्वास्थ्य की ओर उन्मुख किया।`
लॉर्ड रिचर्ड एटनबरो-
जब महात्मा गांधी से यह पूछा गया कि मनुष्य के किस गुण की वे
प्रशंसा करते हैं तो उन्होंने तुंत,सरलतापूर्वक उनर दिया - हौंसला।
उन्होंने कहा -अहिंसा कायरता छिपाने की ढ़ाल नहीं हैं। यह तो बहादुरों का
हथियार है।
लुईस फिशर-
एक अर्धनग्न बूढ़ा जो ग्रामीण भारत में बसता था,उसके निधन पर मानवता रोई ।
के.एम. मुंशी -
"उन्होंने अराजकता पायी और उसे व्यवस्था में परिवर्तित कर
दिया, कायरता पायी ओर उसे साहस में बदल दिया, अनेक वर्गों में विभाजित
जनसमूह को राष्ट्र में बदल दिया, निराशा को सौभाग्य में बदल दिया, और बिना
किसी प्रकार की हिंसा या सैनिक शक्ति का प्रयोग किये एक साम्राज्यवादी
शक्ति के बन्धनों का अंत कर विश्व शक्ति को जन्म दिया।"
विनोबा भावे -
जिन दिनों में काशी में था, मेरी पहली अभिलाषा हिमालय की
कंदराओं में जाकर तप-साधना करने की थी। दूसरी अभिलाषा थी, बंगाल के
क्रांतिकारियों से भेंट करने की. लेकिन इनमें से एक भी अभिलाषा पूरी न हो
सकी. समय मुझे गांधी जी तक ले गया। वहां जाकर मैंने पाया कि उनके
व्यक्तित्व में हिमालय जैसी शांति है तो बंगाल की क्रांति की धधक भी. मैंने
छूटते ही स्वयं से कहा था, मेरे दोनों इच्छाएं पूरी हुईं.
श्री राजिव दीक्षित-
जिनके सम्पर्क में आने मात्र से सकारात्मक विचार का संचार
होता हे। गाधिजि जेसे महापुरुष के बारे में बोलना मेरे जेसे सामान्य मनुष्य
के लिए सौभाग्य की बात हे। राजनीति में इक ऐसा महापुरुष जिसकी कथनी ओर
करणी एक रही। जब की आज के नेता बोलते क्या हे ओर करते क्या हे। उनके बारे
में ऐसा बोलू की पिछले 500 वर्षो में ऐसा महापुरुष नही हुआ तो कोई
अतिश्योक्ति नही होगी।
इ ऍफ़ शूमेकर(ब्रिटिश गांधीवादी अर्थशास्त्री)-
मुझे सबसे बड़ा खेद रहेगा मेरी जिंदगी का की में गांधीजी से
मिल न सका आप जानते हो की में हिटलर से भागकर भारत में स्थायी होने का मन
बना लिया। भारत वह भूमि जिसने गांधी जेसे आदमी को जन्म दिया जो किसीसे डरता
नहीं। में काशी के कुछ गांधीवादियों के संर्पक में हु। उनके आश्रम से
संपर्क में हु। वह कुछ मुझसे सीखते हे पर में उनसे ज्यादा सीखता हु।
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस -
महात्मा गांधी और मेरी विचारधारा अलग-अलग हो सकती है,परंतु
भारत को आजादी दिलाने का हम दोनों का मकसद एक है। इसलिए बापू का नाम सामने
आते ही मैं नतमस्तक हो जाता हूं।
बाल गंगाधर तिलक -
बहुत-सी बातों में लोगों का गांधी जी से मतभेद हो सकता है और
बहुत से लोग उनसे अधिक विद्वान हो सकते हैं,परन्तु उनमें चरित्र की जो
महत्ता है,उसके कारण वह सब लोगों के आदर्श हो गए।
गोपालकृष्ण गोखले -
गांधी जी निस्संदेह उस धातु के बने हुए हैं,जिससे बलिदानी
लोगों का निर्माण होता है। आत्मिक शक्ति के बल पर ही महात्मा गांधी विश्वभर
में छाए रहे।
खान अब्दुल गफ्फार खान-
महात्मा गांधी को गुलामी के अंधेरे में सहायता के लिए प्रकाश की एक मात्र किरण बताया था।
रविन्द्र नाथ टैगोर-
महात्मा गांधी आए और भारत के लाखों वंचित परिवारों के साथ खड़े हो गए।
लोगों के एक ऐसे नेता जो केवल बाह्य प्राधिकरण से असमर्थित रहे, एक ऐसे राजनेता जिनकी सफलता न तो शिल्पकला और न ही तकनीकी युक्तियों के महारत पर टिकी थी, बल्कि उनके व्यक्तित्व की अद्भुत शक्ति, एक विजयी संघर्षकर्ता, जो हमेशा बल के उपयोग से बचते रहे, बौद्धिकता और करुण के भंडार, लचीले और सुनम्य व्यवहार से सज्जित, जिन्होंने अपनी पूरी ताकत अपने लोगों के उत्थान और बेहतरी में लगा दी, एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने सरल मानव की प्रतिष्ठा के साथ यूरोप की क्रूरता का सामना किया और इस प्रकार एक अनश्वर विजेता बन गए।
लोगों के एक ऐसे नेता जो केवल बाह्य प्राधिकरण से असमर्थित रहे, एक ऐसे राजनेता जिनकी सफलता न तो शिल्पकला और न ही तकनीकी युक्तियों के महारत पर टिकी थी, बल्कि उनके व्यक्तित्व की अद्भुत शक्ति, एक विजयी संघर्षकर्ता, जो हमेशा बल के उपयोग से बचते रहे, बौद्धिकता और करुण के भंडार, लचीले और सुनम्य व्यवहार से सज्जित, जिन्होंने अपनी पूरी ताकत अपने लोगों के उत्थान और बेहतरी में लगा दी, एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने सरल मानव की प्रतिष्ठा के साथ यूरोप की क्रूरता का सामना किया और इस प्रकार एक अनश्वर विजेता बन गए।
हो चि मिन्ह-
"मैं और अन्य क्रांतिकारी महत्मा गांधी के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शिष्य हैं, न इससे कम न इससे अधिक":
पर्ल एस. बुक-
"वे सही थे, उन्हें पता था कि वे सही हैं, हम सभी को पता है
कि वे सही थे। एक ऐसा मनुष्य जिसने उन्हें मारा डाला, उसे भी पता था कि
वे सही हैं। हिंसा की विचारधारा कितनी भी लंबी चले परन्तु उन्होंने सिद्ध
किया है कि गांधी जी सही थे 'उसे समाप्त करो' उन्होंने कहा 'किन्तु
हिंसा के बिना' दुनिया हिंसा से पीडित है। "
बर्नार्ड शॉ-
"गांधी जी के प्रभाव? आप हिमालय के कुछ प्रभावों के बारे में पूछ सकते हैं"
अर्ल माउंटबेटन-
"महात्मा गांधी को इतिहास में महात्मा बुद्ध और ईसा मसीह का दर्जा प्राप्त होगा":
स्वामी शिवानंद-
भारतवर्ष जो की India भी कहलाता है हमेशा से उच्च आदर्शों का
देश रहा है, और एक महामानव गाँधी जिसने इन आदर्शों को अपनी दिनचर्या में
धारण कर दिखाया| उनका नाम निजी और सार्वजानिक जीवन में सत्य अहिंसा और
आदर्शवाद का पर्याय बन चूका है| गाँधी का जीवन मानव पर आस्था और मानव पर
इश्वर की जीत का गवाह है| आत्मनियंत्रण और अनुशासन का निरंतर अभ्यास और
परमात्मा में अटूट विश्वास ने सारी बाधायों को पारकर उन्हें सभी प्रकार की
बुराइयों से लड़ाई में सफलता दिलाई| स्वयं पर पूर्ण नियंत्रण कैसे करें ये
दिखाया| गरीब, दलित हरिजन, और भारतीय गांव के आम आदमी के हितों के लिए
गांधी जी की फर्म और दृढ़ पालन, अनुकरण का वास्तव में योग्य है। समय और
शक्ति और प्रसिद्धि के सभी उलटफेर के माध्यम से, वह भारतीय कांग्रेस की
दृष्टि मौलिक जिस उद्देश्य के लिए यह किया जा रहा-गरीब की पीड़ा के सुधार
में आया से पहले रखा| जीवन भर गरीबों के मित्र बने रहे और उनके उत्थान के
लिए अथक प्रयास किये| उन्होंने भी उनमे भगवन का रूप देखा| वस्तविक राष्ट्रपिता के रूप में उन्होंने हर आम भारतियों में
उसके धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर बदलाव लाये |महात्मा जी ने पूर्ण
सात्विकता का जीवन की राह दिखाया| उनका पूरा जीवन "मैं" से उपर उठकर दिव्य
जीवन जीने की कला सिखाता है| वह उस तालाब में कमल के समान थे|
अंत में इतना ही कहुगा सब महापुरुष के वचन देख के की महात्मा
गांधी मानव नहीं थे वह मानवता थे। वह व्यक्ति नहीं थे परंतु व्यक्तित्व थे।
वह सुसंस्कृत पृरुष नहीं पर खुद में एक संस्कृति थे।
आने वाली पीढ़िया मेरे जेसे कितने नौजवान का जीने की कला
मानवता का पाठ पढ़ाती जायेगि पर यह हम पे निर्भर करता हे की गांधीजी जेसे
ख़ज़ाने को हम कितना लूंट पाते हे या फिर एक कमजोर की भाँति खड़े रह जाते हे।

